पेरिस AI समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण

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सम्माननीय गणमान्य व्यक्तियों, शोधकर्ताओं, उद्योग के नेताओं, और सभी उपस्थित महानुभावों,

यह मेरे लिए बहुत गर्व और सम्मान की बात है कि मैं पेरिस में इस महत्वपूर्ण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समिट में आप सभी के बीच उपस्थित हूं। आज का यह आयोजन केवल तकनीकी विकास का उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारे साझा भविष्य के लिए एक दिशा तय करने का अवसर भी है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस – संभावनाओं की नई दुनिया

AI आज के युग की सबसे क्रांतिकारी तकनीकों में से एक है। यह न केवल हमारे जीवन को आसान बना रही है, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में नई संभावनाओं के द्वार भी खोल रही है। स्वास्थ्य सेवा से लेकर कृषि तक, शिक्षा से लेकर व्यापार तक, AI हर क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही है।

भारत में, हमने डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे अभियानों के माध्यम से प्रौद्योगिकी को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया है। हमारे युवाओं का नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति AI के क्षेत्र में भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जा रही है।

AI को नैतिक और जिम्मेदार बनाना जरूरी

AI की शक्ति अपार है, लेकिन हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इसका उपयोग नैतिकता और मानवता की भलाई के लिए हो। AI को सतत विकास, समावेशी प्रगति और विश्व शांति के लिए उपयोग में लाया जाना चाहिए।

भारत न्यायसंगत, पारदर्शी और निष्पक्ष AI के लिए प्रतिबद्ध है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि AI पूर्वाग्रह मुक्त हो, सभी के लिए समान अवसर प्रदान करे, और समाज में सकारात्मक बदलाव लाए।

साझा प्रयासों की आवश्यकता

AI का प्रभाव सीमाओं से परे जाता है। इसलिए, इसकी नीति-निर्माण, विकास और उपयोग में सभी देशों को एक साथ आना होगा। हमें वैश्विक सहयोग और साझेदारी को मजबूत करना होगा ताकि AI का लाभ सभी तक पहुँच सके।

भारत “AI for All” के दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है। हमने नेशनल AI मिशन की शुरुआत की है, और हम एआई को ग्रामीण भारत तक ले जाने के लिए प्रयासरत हैं। हम चाहते हैं कि AI केवल तकनीकी विशेषज्ञों तक सीमित न रहे, बल्कि यह समाज के हर वर्ग तक पहुँचे।

हरित और सतत AI विकास

AI केवल डिजिटल परिवर्तन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भी मदद कर सकता है। ग्रीन AI की अवधारणा के तहत, हमें AI के विकास को पर्यावरणीय रूप से अनुकूल बनाना होगा।

भारत नवीकरणीय ऊर्जा, सतत विकास और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा दे रहा है। AI के लिए हरित ऊर्जा का उपयोग इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

निष्कर्ष

AI का भविष्य हमारे हाथों में है। हम इसे एक ऐसी शक्ति बना सकते हैं जो मानवता की भलाई के लिए काम करे। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि AI केवल तकनीक न बने, बल्कि यह नैतिकता, समानता और मानव कल्याण की एक नई परिभाषा गढ़े।

भारत वैश्विक AI नेतृत्व में सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है। हमें विश्वास है कि AI एकजुटता, समृद्धि और प्रगति का माध्यम बनेगा।

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